नेपाल में भड़की हिंसा का असर अब उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की परिवहन सेवाओं पर भी साफ दिखने लगा है। हरिद्वार से नेपाल सीमा से सटे टनकपुर-बनबसा और रुपईडीहा के लिए रोजाना विभिन्न डिपो की 30 से अधिक बसें संचालित होती हैं। परंतु पिछले दो दिनों में यात्रियों की संख्या में अचानक गिरावट दर्ज की गई है।
अब तक उत्तराखंड परिवहन निगम की सेवाएं इस बार के मानसून काल में आई आपदा के कारण खासी प्रभावित रही। निगम को उम्मीद थी कि आगामी सीजन में हालात सुधरेंगे और बसों की आवाजाही सामान्य होगी। परंतु नेपाल हिंसा की खबरों ने निगम की इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है।
परिवहन निगम के अधिकारियों के अनुसार नेपाल हिंसा का सीधा असर यात्रियों की संख्या पर पड़ रहा है। बनबसा और रुपईडीहा से लौटने वाली बसों में यात्रियों की संख्या बहुत कम हो गई है। वहीं जाने वाले यात्रियों की संख्या भी कमी आई है। हरिद्वार से नेपाल जा रहे यात्री मान बहादुर ने बताया कि वे पिछले छह माह से जोशीमठ मलारी में काम कर रहे थे। उन्हें दो दिन पहले इंटरनेट मीडिया के माध्यम से नेपाल में भड़की हिंसा की जानकारी मिली।
मान बहादुर ने बताया कि उनका गांव हिंसा प्रभावित क्षेत्र राजधानी काठमांडू से काफी दूर है, फिर भी घर की चिंता हो रही है। उन्होंने कहा कि उनके कुछ परिचित नेपाल से आना चाहते थे, परंतु सीमा पार करने में उन्हें दिक्कत हो रही है। नजीबाबाद डिपो की एक बस के चालक नफीस ने जानकारी दी कि हरिद्वार से रुपईडीहा की दूरी लगभग 580 किलोमीटर है। सामान्य दिनों में इस मार्ग पर पर्याप्त यात्री मिल जाते थे, लेकिन फिलहाल यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट है।

