दून में आपदा संग आई तबाही की रफ्तार ने मानसून काल के सभी रिकार्ड तोड़ दिए। बादल फटने के बाद उफनाई नदियों ने सड़कों से लेकर पुलों की बुनियाद हिला दीं। जिन पुलों को अभी पचासों साल बगैर हिले चलना था, वे नदियों के प्रवाह के आगे घुटने टेक गए।

दून में आपदा के कहर का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि पूरे राज्य में तीन माह के आपदाकाल में कुल 19 पुलों को क्षति पहुंची। इसके विपरीत दून में 15-16 सिंतबर को 24 घंटे के अंदर आठ पुल क्षतिग्रस्त हो गए। इससे देहरादून के विभिन्न हिस्सों में कनेक्टिविटी प्रभावित हो गई है। अब लोनिवि पुलों पर अस्थाई यातायात संचालन की व्यवस्था कर लाइफलाइन को पटरी पर लाने की कोशिशों में जुटा है।
धूमाकोट में कलगड़ी व भटवाड़ी के धियागाड में बना सेतु पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके अलावा 17 अन्य पुल आंशिक तौर पर क्षतिग्रस्त हुए हैं। आंशिक क्षतिग्रस्त पुलों में 9 पुल उत्तरकाशी व 8 पुल देहरादून के हैं। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में भी पुलों को काफी क्षति पहुंची है। इस योजना के तहत बने कुल दो पुल पूरी तरह टूट गए। वहीं 17 पुल आंशिक क्षतिग्रस्त हुए हैँ। इनकी मरम्मत चल रही है।
लोक निर्माण विभाग के क्षतिग्रस्त पुलों में धारचूला में सोबला-उमचिया पुल पुल सर्वाधिक 6.3 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। जखोली रणधार पुल पर 5 करोड़, साड असोला मोटर मार्ग पुल पर 4.5 करोड़, चमोली में देवाल-खेता पुल पर 4 करोड़, कार्लीगाड मझाड़ा का पुल पर चार करोड़ व धराली में भागीरथी पर बने 100 मीटर सेतु बनाने में 3.3 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *