राज्य सूचना आयोग ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि यदि लोकसेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के किसी मामले में केस दर्ज किया जा चुका है, या राज्य सरकार के द्वारा जांच की अनुमति दी जा चुकी है तो उसकी जानकारी सूचना के अधिकार के अंतर्गत नागरिकों को दी जा सकती है। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मामले की जांच जारी है और उससे संबंधित कोई सूचना देने से जांच में बाधा पैदा होने की आशंका है तो संबंधित अधिकारी ऐसी सूचना देने से इनकार कर सकते हैं।
राज्य सूचना आयुक्त कुशला नंद ने संजीव चतुर्वेदी की एक अपील पर निर्णय देते हुए कहा है कि यदि लोकसेवकों के किसी भ्रष्टाचार के मामले में अदालत में मुकदमा दर्ज हो चुका है तो इसकी जानकारी भी आम नागरिकों को उपलब्ध कराई जा सकती है। हालांकि, फाइल नोटिंग को आयोग ने विभागीय आंतरिक कार्रवाई का हिस्सा माना है और इसकी जानकारी उपलब्ध कराने को सही नहीं ठहराया है।
अब तक यह धारणा रही है कि लोकसेवकों को किसी दबाव से मुक्त होकर कार्य करने के लिए उनसे संबंधित मामलों की जानकारी आम नागरिकों को नहीं उपलब्ध करानी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उन पर अनावश्यक दबाव पैदा करने की कोशिश की जा सकती है। इससे उनका कामकाज प्रभावित हो सकता है। लेकिन आयोग के इस निर्णय से भ्रष्टाचार में लिप्त लोकसेवकों की जानकारी आम लोगों को उपलब्ध हो सकेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *