देहरादून। राजधानी देहरादून में अगर किसी ने कहीं पर कोई प्लॉट खरीद लिया तो जमीन पर घर बनाना भूस्वामी के लिये अजाब हो चुका है। पहले उस पर लोकल के नाम पर कुछ लोग दबाव बनाते हैं, फिर बाहरी होने का ठप्पा लगाकर किसी भी तरह पैंसे ऐंठने की तरकीब लगाई जाती है। और यहीं से षुरू होता है ब्लैकमेलिंग का धंधा।
जी हां हम बात कर रहे हैं देहरादून षहर की। जहां एक नहीं ऐसे सैंकड़ों मामले प्रकाष में आ चुके हैं जब जमीन खरीद से लेकर भवन निर्माण तक भू-स्वामी को कदम-कदम पर लूट लिया जाता है। एक सरकारी सिस्टम है, जहां से जमीन खरीद से लेकर रजिस्ट्री, नक्षा पास कराने तक भूस्वामी को चप्पलें घिसनी पड़ती हैं। उपर से दफ्तरों में बैठे बाबू या बिचोलिए उससे अंडर द टेबल मोटी रकम झटक लेते हैं।
दूसरी ओर भू-स्वामी पर उस जगह पर आस-पास के लोगों का भी दबाव रहता है। जमीन के इर्दगिर्द मौजूद लोग जमीन पर निर्माण होने से पहले ही, भूस्वामियों को पेरषान करने के कई हथकंडे अपनाते दिखाई देते हैं।
जबकि षहर के दूर दराज के इलाकों में जमीनों के बिकने से वहां अच्छी सड़कें, बिजली, पानी की आपूर्ति बेहतर होती है। इलाके में विकास तेजी से होता दिखाई देता है, बावजूद इसके जमीन खरीदने वाले अपनी ही जमीन में घर बनाने के लिये न जाने कितने स्तर पर जूझ रहे होते हैं।
जय भारत टीवी को नाम न छापने की षर्त पर एक भूस्वामी द्वारा अपनी आपबीती बताई गई। उनका कहना है कि उन्होंने सरकार के तमाम नियम कानूनों के दायरे में जमीन खरीदी। सरकारी सिस्टम के तहत हर स्तर पर लिया जाने वाला षुल्क आदि जमा भी कराया। उसके बाद अपने प्लॉट तक बेहतर सड़क पहुंचाने के लिये रात-दिन कोषिष की। अच्छी सड़क, बिजली आपूर्ति, पेयजल की व्यवस्था भी इलाके में सुचारू कराई। इससे न केवल उनकी जमीन बल्कि पूरे इलाके में व्यवस्थाएं बेहतर हुईं। मगर इसके बावजूद आस-पास के लोगों को वो खटकने लगे। लोग तरह तरह के आरोप लगाकर उन्हें ब्लैकमेल करने लगे। जिससे वो खासे परेषान हो चुके हैं।
ये एक मामला नहीं है, ऐसे सैंकड़ों मामले देहरादून और आस-पास के इलाकों में आये दिन सामने आ रहे हैं, जब भूस्वामियों पर बेवजह के आरोप लगाकर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता है।

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